आध्यात्मिक पूर्णता प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका भगवान श्री कृष्ण की सीधे पूजा करना है, जो कि पुरुषोत्तम भगवान हैं। लेकिन व्यक्ति अवैयक्तिकता के मार्ग पर चलकर भी कई जन्मों के बाद सर्वोच्च गंतव्य प्राप्त कर सकता है। लेकिन जब व्यक्ति कृष्ण को समर्पित होकर तुरंत सभी दुखों से मुक्त हो जाता है, तो अपने मोक्ष को क्यों टालना और जन्म-जन्मांतर तक कष्टमय स्थिति में रहना? यही वास्तविक बुद्धिमत्ता है।
इस सप्ताह के लिए कार्य
भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 12, श्लोक 3-4 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
भक्ति मार्ग और निराकारवाद के मार्ग में क्या अंतर है?
अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com
(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)
