पाठ 343: दो प्रकार के योगीजन

दो प्रकार के योगीजन हैं: सगुणवादी, जो कहते हैं कि परम सत्य साकार है, और निर्विशेषवादी, जो कहते हैं कि परम सत्य का साकार रूप नहीं है। भगवान श्री कृष्ण ने भगवद्गीता में इन दो प्रकार के योगीजन के बीच स्पष्ट रूप से अंतर किया है।

इस सप्ताह के लिए कार्य

भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 12, श्लोक 1 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
किस प्रकार के योगीजन को अधिक परिपूर्ण माना जाता है और क्यों?

अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com

(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)