कृष्णभावनामृत के इस मार्ग पर सफल होने के लिए व्यक्ति को भगवान श्री कृष्ण को विचार और कर्म के सभी क्षेत्रों में सर्वोच्च अधिकारी के रूप में स्वीकार करना चाहिए और इस प्रकार सभी समय, स्थान और परिस्थितियों में अपने विचारों, शब्दों और कर्मों को उसी के अनुसार ढालना चाहिए। ऐसा प्रयास आध्यात्मिक पूर्णता के मार्ग पर उसकी सफलता की गारंटी देगा।
इस सप्ताह के लिए कार्य
भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 11, श्लोक 55 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
इस श्लोक को भगवद्गीता का सार क्यों माना जाता है?
अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com
(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)
