पाठ 341: सबसे शानदार अविभाजित भक्ति सेवा

यह संपूर्ण भगवद गीता के प्रमुख श्लोकों में से एक है। इसलिए इसे और श्रील प्रभुपाद के तात्पर्य को बहुत ध्यान से पढ़ें ताकि इसके अंतरतम अर्थ को गहराई से समझा जा सके। यह कृष्ण की शुद्ध भक्ति सेवा के मार्ग पर आपकी प्रगति को बहुत सशक्त करेगा, जो सभी योग प्रणालियों, भक्ति योग की पूर्णता अवस्था है।

इस सप्ताह के लिए कार्य

भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 11, श्लोक 54 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
अविभाजित भक्ति सेवा इतनी गौरवशाली क्यों है?

अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com

(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)