कृष्ण अपनी मधुर इच्छा से ही असीमित रूपों में प्रकट हो सकते हैं। यह उन तरीकों में से एक है जिससे वे सर्वोच्च आनंददाता और सभी अस्तित्व के स्रोत के रूप में अपनी आनंद लीलाएँ प्रकट करते हैं। अभक्तों के लिए यह एक रहस्य बना रहता है। लेकिन उनके भक्तों के लिए यह बहुत आनंद का स्रोत है।
इस सप्ताह के लिए कार्य
भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 11, श्लोक 53 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
कृष्ण को समझने का रहस्य क्या है?
अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com
(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)
