पाठ 322: श्रील प्रभुपाद की योजना का अनुसरण

जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को शत्रु सैनिकों के विरुद्ध युद्ध करने का आदेश दिया था, उसी प्रकार श्रील प्रभुपाद ने अपने अनुयायियों को कृष्णभावनामृत के विज्ञान को समझने में निपुण बनने, गुरु बनने तथा कृष्णभावनामृत के विज्ञान में सभी को प्रबुद्ध करके संपूर्ण विश्व को अंधकार से मुक्ति दिलाने का आदेश दिया है।

श्रील प्रभुपाद ने भगवद्गीता, अध्याय 11, श्लोक 34 के अपने तात्पर्य में हमें इस प्रकार शिक्षा दी है:

“प्रत्येक योजना भगवान् द्वारा बनती है, किन्तु वे अपनेभक्तों पर इतने कृपालु रहते हैं कि जो भक्त उनकी इच्छानुसार उनकी योजना का पालनकरते हैं, उन्हें ही वे उसका श्रेय देते हैं। अतः जीवन को इस प्रकार गतिशील होनाचाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति कृष्णभावनामृत में कर्म करे और गुरु के माध्यम सेभगवान् को जाने। भगवान् की योजनाएँ उन्हीं की कृपा से समझी जाती हैं और भक्तों कीयोजनाएँ उनकी ही योजनाएँ हैं। मनुष्य को चाहिए कि ऐसी योजनाओं का अनुसरण करे औरजीवन-संघर्ष में विजयी बने।”

चूँकि श्रील प्रभुपाद की योजना है कि पूरा विश्व कृष्णभावनामृत बन जाए, इसलिए यदि हम उनके विश्व उद्धार मिशन में उनकी सहायता करते हैं तो हम निश्चित रूप से अपने मानव जीवन के उद्देश्य को पूरा करने में विजयी होंगे। हमारा जीवन गौरवशाली बन जाएगा और पूरा विश्व सुखी हो जाएगा।

इस सप्ताह के लिए कार्य

भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 11, श्लोक 34 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
श्रील प्रभुपाद के विश्व उद्धार मिशन में हमे सहायता क्यों करनी चाहिए?

अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com

(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)