कृष्ण ने न केवल हमारे ग्रह मंडल में सार्वभौमिक रूप को देखने की शक्ति अर्जुन को दी। उन्होंने अर्जुन को अन्य ग्रह मंडलों में प्रकट सार्वभौमिक रूपों को देखने की शक्ति भी प्रदान की। जरा सोचिए कि कृष्ण कितने शक्तिशाली हैं जिन्होंने अर्जुन को ऐसी असाधारण दृष्टि शक्ति प्रदान की। कृष्ण के सार्वभौमिक रूप के अनेक रूपों को देखने से भी अधिक आश्चर्यजनक है उनके मूल त्रिगुणात्मक रूप को बांसुरी बजाते हुए प्रत्यक्ष रूप में देखना। कृष्ण यह दृष्टि उन सभी को प्रदान करते हैं जो शुद्ध प्रेमपूर्ण भक्ति में अपने आपको पूरी तरह से उनके प्रति समर्पित कर देते हैं। वास्तव में इससे बढ़कर कोई आध्यात्मिक पूर्णता नहीं है। यह ऐसी चीज है जिसे हममें से प्रत्येक प्राप्त कर सकता है यदि हम इसके लिए ईमानदारी से प्रयास करें।
इस सप्ताह के लिए कार्य
भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 11, श्लोक 20 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
कृष्ण की महिमा का दोहराव साहित्यिक दोष क्यों नहीं है जिसे दोहराव कहा जाता है?
अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com
(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)
