हम अपनी साधारण आँखों से असीमित नहीं देख सकते। लेकिन भगवान श्री कृष्ण की असीमित अकल्पनीय शक्ति के कारण कुछ भी संभव है। इसलिए केवल कृष्ण की कृपा से ही अर्जुन भगवान के सबसे अद्भुत विश्वरूप को देख पाए, जिनके असीमित मुख, असीमित आँखें हैं, जो अनेक दिव्य आभूषणों से सुशोभित है, जो अनेक दिव्य हथियार धारण किए हुए है, तथा दिव्य माला और वस्त्र पहने हुए है और जिसके शरीर पर अनेक दिव्य सुगंधियाँ लगी हुई हैं।
इस सप्ताह के लिए कार्य
भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 11, श्लोक 10-11 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
क्या कृष्ण का शुद्ध भक्त बनने के लिए उनके विश्वरूप को देखना आवश्यक है?
अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com
(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)
