हम कितने भाग्यशाली हैं कि हमारे पास प्रेममय, दयालु भगवान हैं, जो सभी अस्तित्व का सर्वशक्तिमान स्रोत हैं। वे हमारे सर्वज्ञ, शुभचिंतक पिता हैं। हमें उनकी प्रेममयी और क्षमाशील दयालुता का पूरा लाभ उठाना चाहिए और उनके साथ अपने खोए हुए प्रेमपूर्ण संबंध को फिर से स्थापित करना चाहिए। कोई भी अन्य कार्य करना सरासर मूर्खता है। बुद्धिमान होना, मूर्ख न होना हमारे लिए विशेष लाभ है। बुद्धिमानी से उनके प्रति समर्पण करके हम असीमित सर्व-शुभ लाभ प्राप्त करेंगे।
इस सप्ताह के लिए कार्य
भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 11, श्लोक 3 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
कृष्ण ऐसा क्या कर सकते हैं जो कोई और नहीं कर सकता, जिससे यह सिद्ध हो कि वे भगवान हैं?
अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com
(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)
