अँधेरी, ठंडी, भयानक सर्दी के बाद हर किसी को वसंत पसंद होता है। और फिर जब सारे फूल खिलने लगते हैं तो यह और भी अद्भुत हो जाता है। तो यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि ऐसी सार्वभौमिक रूप से प्रशंसित ऋतु भगवान श्री कृष्ण की अभिव्यक्ति हो। जैसे वसंत अद्भुत है, कृष्ण उससे भी अधिक अद्भुत हैं। इस प्रकार कृष्णभावनाभावित रहकर व्यक्ति सदैव अपने हृदय में एक सुंदर, ताज़ा, स्फूर्तिदायक वसंत में रहेगा। लेकिन भौतिकवादी इतने मूर्ख हैं कि वे अपने दिलों में एक अंधेरी, नीरस सर्दी में रहते हैं। क्या यह अफ़सोस की बात नहीं है?
इस सप्ताह के लिए कार्य
भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 10, श्लोक 35 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
हर किसी को कृष्णभावनामृत के वसंत में लाने के लिए क्या किया जा सकता है?
अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com
(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)
