इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं, आपका लिंग क्या है, आपकी जाति, आपकी राष्ट्रीयता, आपकी शिक्षा, आपकी आर्थिक स्थिति, या कुछ और। यदि आपको कृष्ण के प्रति समर्पण करने की परम आवश्यकता का एहसास होता है और आप ऐसा करना चुनते हैं, तो आपको कृष्ण और आध्यात्मिक गुरु से ऐसा करने की पूरी सुविधा मिलेगी और आप अपना जीवन परिपूर्ण बना सकेंगे। तो क्यों न इस सर्वोच्च शुभ अवसर का लाभ उठाए और वो भी अभी? आप अपने फैसले का जश्न अनंत काल तक मनाएंगे।
इस सप्ताह के लिए कार्य
भगवद-गीता यथा रूप अध्याय 9, श्लोक 32 को ध्यान से पढ़ें और इस प्रश्न का उत्तर दें:
कृष्ण सभी को अपना भक्त बनने का समान अवसर क्यों देते हैं?
अपना उत्तर ईमेल करें: hindi.sda@gmail.com
(कृपया पाठ संख्या, मूल प्रश्न और भगवद गीता अध्याय और श्लोक संख्या को अपने उत्तर के साथ अवश्य शामिल करें)
